ताजमहल

ताजमहल विश्व के सात आश्चर्यों में से एक है। इसकी सौंदर्यता अद्वितीय
है। 350 सौ वर्ष से
अधिक प्राचीन इस स्मारक को देखने के लिए देश विदेश से लाखों लोग यहां हर साल आते
हैं।  इसका निर्माण सन् 1631 ईसवी में हुआ था। यमुना नदी के
किनारे पर बड़ी शान से खड़े इस इमारत का निर्माण शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की
याद में करवाया था। इसे 20 हजार मजदूरों ने 20 साल में पूरा किया था। इसे बनाने
के लिए सम्राट ने दूसरे देशों से वास्तुकला के उच्च कोटी के कारिगर बुलाये थे। इसे
सफेद संगमरमर से बनाया गया है। इसके तीनों ओर सुंदर बाग है जहां यमुना की स्वच्छ
एवं शीतल धारा बहती है। इसका द्वार लाल पत्थरों से बनाया गया था तथा एक छोटा सा
अजायबघर भी है इसमें बनाया गया था । जिसमें  मुगल बादशाहों के अस्त्र शस्त्र रखे हुए हैं। 275 फुट ऊंचे ताजमहल के  चारों ओर छोटे छोटे गुम्बद बने हुए हैं। ताजमहल
की दीवारों पर कला के सुंदर नमूने देखने को मिलते हैं तथा नक्कशी की बेहतरीन मिसाल
यहां देखने को मिलती है । ताज महल में मुमताज शाहजहां की कब्रें हैं पर यह
वास्तविक कब्रें नहीं है।  इन दोनों की वास्तवित
कब्रें ठीक समाधि के नीचे ही हैं। इनके आसपास सुंदर जालियां बनी हुई हैं। शरद
पूर्णिमा में ताजमहल की शोभा दोगुनी हो जाती है इसकी सुंदरता को देखने के लिए देश-विदेश
के लोग हर साल यहां आते हैं इस सुंदर स्मारक ताजमहल पर नाम भारत में नहीं बल्कि
संपूर्ण जगत में आश्चर्य और सम्मान से लिया जाता है यह हमारे देश का गौरव है।

ताजमहल

ताजमहल विश्व के सात आश्चर्यों में से एक है। इसकी सौंदर्यता अद्वितीय
है। 350 सौ वर्ष से
अधिक प्राचीन इस स्मारक को देखने के लिए देश विदेश से लाखों लोग यहां हर साल आते
हैं।  इसका निर्माण सन् 1631 ईसवी में हुआ था। यमुना नदी के
किनारे पर बड़ी शान से खड़े इस इमारत का निर्माण शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की
याद में करवाया था। इसे 20 हजार मजदूरों ने 20 साल में पूरा किया था। इसे बनाने
के लिए सम्राट ने दूसरे देशों से वास्तुकला के उच्च कोटी के कारिगर बुलाये थे। इसे
सफेद संगमरमर से बनाया गया है। इसके तीनों ओर सुंदर बाग है जहां यमुना की स्वच्छ
एवं शीतल धारा बहती है। इसका द्वार लाल पत्थरों से बनाया गया था तथा एक छोटा सा
अजायबघर भी है इसमें बनाया गया था । जिसमें  मुगल बादशाहों के अस्त्र शस्त्र रखे हुए हैं। 275 फुट ऊंचे ताजमहल के  चारों ओर छोटे छोटे गुम्बद बने हुए हैं। ताजमहल
की दीवारों पर कला के सुंदर नमूने देखने को मिलते हैं तथा नक्कशी की बेहतरीन मिसाल
यहां देखने को मिलती है । ताज महल में मुमताज शाहजहां की कब्रें हैं पर यह
वास्तविक कब्रें नहीं है।  इन दोनों की वास्तवित
कब्रें ठीक समाधि के नीचे ही हैं। इनके आसपास सुंदर जालियां बनी हुई हैं। शरद
पूर्णिमा में ताजमहल की शोभा दोगुनी हो जाती है इसकी सुंदरता को देखने के लिए देश-विदेश
के लोग हर साल यहां आते हैं इस सुंदर स्मारक ताजमहल पर नाम भारत में नहीं बल्कि
संपूर्ण जगत में आश्चर्य और सम्मान से लिया जाता है यह हमारे देश का गौरव है।